कोलकाता, मणिपुर में जातीय संघर्ष के बाद दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने की घटना से क्षुब्ध कोलकाता के एक कलाकार ने दुर्गा प्रतिमा में आम महिलाओं की मजबूती को दर्शाया है। साधारण साड़ी पहने और चेहरे पर दृढ़ता के भाव वाली दुर्गा प्रतिमा के पीछे महिलाओं और पुरुषों का कारवां प्रदर्शित किया गया है। जबकि उनके साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश भी हैं।
शहर के बागुईआटी में अर्जुनपुर अमरा सबाई क्लब की थीम ‘गणदेवता’ है। मूर्तिकार भबातोष सुतार ने पीटीआई-भाषा से कहा, “ एक संवेदनशील इंसान होने की वजह से मैं, मणिपुर में जो हो रहा है, उससे क्षुब्ध हूं और यह दर्द तब झलका जब मैंने प्रतिमा बनाई। उन्होंने कहा, “ हम नारी को देवी के रूप में स्थापित करते हैं और उसे ‘स्त्री शक्ति’ के अवतार के रूप में पूजते हैं। इसी दौरान हम महिलाओं पर हमले करते हैं, उन्हे निर्वस्त्र करते हैं और उन्हें अपमानित करते हैं। हर संघर्ष में महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है, वह आसान लक्ष्य होती हैं।”
प्रतिमा की सरंचना खुरदरी है न कि चकनी है जैसी हर प्रतिमा होती है और यह हर महिला की जिंदगी को दर्शाती है। पंडाल में देवी के बच्चों को लोगों के बीच दर्शाया गया है। सुतार ने अतीत में लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों की यात्रा सहित समसामयिक सामाजिक मुद्दों को दर्शाने वाले विषयों पर काम किया है।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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