मद्यपान यकृत की बीमारी को महामारी में तब्दील करने के लिए जिम्मेदार

विक्टोरिया,  हाल के वर्षों में यकृत (लिवर) की बीमारियों में भारी वृद्धि हुई है। इस बीच  शराब से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसानों  के साक्ष्य भी पुख्ता हुए हैं  जिनमें पूर्व की मान्यता के अनुसार ‘मध्यम’ स्तर के मद्यपान से होने वाले नुकसान भी शामिल हैं।

             अनुसंधानों से यह तथ्य सामने आया है।   ये घटनाक्रम शराब के सेवन को जन स्वास्थ्य के नजरिए से देखने के लिए एक प्रेरक मामला बनाते हैं। एक आंतरिक चिकित्सा चिकित्सक और मद्यपान महामारी विज्ञानी होने के नाते  मुझे रोगियों और सामान्य आबादी में यकृत रोग और शराब के सेवन के बीच के संबंध में दिलचस्पी है। जैसा कि पता चला है  ये विषय आपस में बहुत निकट से जुड़े हुए हैं  लेकिन शायद आश्चर्यजनक तरीकों से।

            यकृत बेहद जरूरी अंग : इंसान को जीने के लिए इसकी जरूरत होती है। यकृत चयापचय और भोजन भंडारण में योगदान देता है  रक्त का थक्का जमाने में मदद करने वाले प्रोटीन का उत्पादन करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली में अहम भूमिका निभाता है।

            कोशिका के स्तर पर  शराब एक विषैला पदार्थ है जिसका चयापचय (विघटन) मुख्यतः यकृत में होता है। जब शराब की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है  तो यकृत की कोशिकाएं सूज जाती हैं और क्षतिग्रस्त हो जाती हैं (यकृत की सूजन को हेपेटाइटिस कहते हैं)।

            समय के साथ  सूजन या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की जगह फाइब्रोसिस आ जाता है  यानी सामान्य यकृत ऊतक का स्थान नुकसान पहुंचाने वाले ऊतक ले लेते हैं  जिसके परिणामस्वरूप सिरोसिस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और यकृत के कार्य करने की क्षमता में शिथिलता आ जाती है। सिरोसिस अपने आप में घातक हो सकता है और यकृत कैंसर का कारण भी बन सकता है।

             शराब यकृत रोग में किस प्रकार हिस्सेदार : शराब के कारण होने वाले यकृत रोग को शराब संबंधित रोग या एएलडी कहा जाता है  जिसे पहले अल्कोहलिक लिवर डिसीज कहा जाता था। ज्यादा शराब पीने वाले  अक्सर शराब सेवन विकार (एयूडी) से पीड़ित लोगों में सिरोसिस और ‘लिवर फेलियर’ हो सकता है।

            लेकिन शराब से जुड़ी यकृत की बीमारी सिर्फ एयूडी/अत्यधिक शराब पीने वाले लोगों को ही प्रभावित नहीं करती। बढ़ते प्रमाण बताते हैं कि कम मात्रा में लंबे समय तक शराब का सेवन भी यकृत की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और बीमारी का कारण बन सकता है  खासकर उन लोगों में जिनमें यकृत की बीमारी के अन्य जोखिम कारक होते हैं।

             शराब सेवन के पैटर्न भी महत्वपूर्ण हैं  खासकर उन लोगों के बीच जो औसतन ज्यादा मात्रा में शराब नहीं पीते। उदाहरण के लिए  बिंज ड्रिंकिंग (जिसे पुरुषों द्वारा एक बार में पांच या उससे ज्यादा पैग या महिलाओं द्वारा चार या उससे ज्यादा पैग पीने के रूप में परिभाषित किया जाता है) सेवन का एक ऐसा पैटर्न है जो यकृत के लिए बहुत हानिकारक है क्योंकि इससे रक्त में अल्कोहल की मात्रा बढ़ जाती है।

            अत्यधिक शराब पीना यकृत के लिए हानिकारक हो सकता है  यहां तक ​​कि उन लोगों के लिए भी जो औसतन बहुत अधिक शराब नहीं पीते हैं या जिन्हें शराब सेवन संबंधी कोई विकार नहीं है।

             यकृत संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतें क्यों बढ़ रही हैं : पिछले दो दशकों में कनाडा और अमेरिका में यकृत की बीमारियों से होने वाली मौतों में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। इसका एक प्रमुख कारण इसी अवधि में शराब की खपत में वृद्धि है  लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें गिरावट देखी गई है। 2016 और 2022 के बीच  कनाडा में शराब संबंधी यकृत बीमारियों से होने वाली मौतों में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लेकिन यकृत की बीमारियों से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी का एकमात्र मुख्य कारण शराब ही नहीं है। एक और कारण मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) नामक बीमारी का बढ़ना भी है।

            जटिल नाम के बावजूद  एमएएसएलडी एक प्रकार का यकृत रोग है  जो उन्हीं चयापचय संबंधी गड़बड़ियों के कारण होता है  जो अधिक वजन और मोटापे के साथ-साथ अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि के कारण होती है। यही वे जोखिम कारक हैं जिनके कारण मधुमेह में वृद्धि हुई है। इसलिए एमएएसएलडी को मधुमेह के यकृत समतुल्य के रूप में समझा जा सकता है।

             हेपेटाइटिस सी रक्त-जनित वायरल संक्रमण है  जो इंजेक्शन द्वारा दवा के उपयोग और सुई साझा करने से हो सकता है  यकृत रोग और सिरोसिस का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण है। मेरे सहयोगियों और मैंने अमेरिका स्थित फ्रामिंघम हार्ट स्टडी के एमएएसएलडी रोगियों का अध्ययन किया। हमने पाया कि ज्यादा शराब न पीने वालों में भी  शराब के सेवन की मात्रा और यकृत की सूजन व फाइब्रोसिस की गंभीरता के बीच एक खुराक संबंध था।

            इसी प्रकार  शराब का कम सेवन भी हेपेटाइटिस सी से पीड़ित लोगों में यकृत सिरोसिस की गति को बढ़ा सकता है। उदाहरण के लिए  अनुसंधान में सामने आया कि हेपेटाइटिस सी के रोगियों द्वारा रोजाना औसत शराब पीने से सिरोसिस के जोखिम में 11 प्रतिशत की वृद्धि होती है।

            शराब के कारण यकृत को होने वाले नुकसान को कैसे रोके या कम करें :

             ज्ञात यकृत रोग वाले व्यक्तिगत रोगियों को चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के अलावा  स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर भी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में शराब के सेवन की जांच  जोखिमपूर्ण शराब पीने की आदतों वाले लोगों के लिए परामर्श और शराब सेवन विकारों वाले लोगों का उपचार शामिल है। इसे प्रभावी ढंग से करने के लिए  इन सभी हस्तक्षेपों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होने चाहिए।

             हालांकि  व्यक्तियों का इलाज करने से बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे का समाधान नहीं होता: जनसंख्या स्तर पर शराब की खपत को कम करने के लिए उपाय आवश्यक हैं ।

   शराब की खपत को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका शराब नियंत्रण नीतियों में  :

             1) शराब को और अधिक महंगा करना (उदाहरण के लिए  शराब पर कर और न्यूनतम मूल्य)।

              2) कम उपलब्धता (जैसे बिक्री के घंटों पर प्रतिबंध  या शराब बेचने वाले स्थानों की संख्या)।

              3) सामाजिक रूप से कम वांछनीय (जैसे विज्ञापन और विपणन या खेल प्रायोजन को सीमित करना) शामिल हैं। 

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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