बेंगलुरु, जद(एस) नेता एच डी कुमारस्वामी ने अपनी पत्नी और पार्टी विधायक अनीता कुमारस्वामी की 10 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनाव लड़ने की ‘‘मांग’’ के बारे में मीडिया में आयी खबरों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘हासन की राजनीति अलग है, मेरी पत्नी की राजनीति अलग है।’’ कुमारस्वामी ने कहा कि अनीता ने पूर्व में पार्टी को बचाने के लिए चुनाव लड़ा था और चुनावी राजनीति में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है और उन्होंने इससे दूर रहने का फैसला किया है। पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी मीडिया में आयी उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिनमें दावा किया गया था कि यदि उनकी भाभी भवानी रेवन्ना को हासन का टिकट मिल जाता है तो अनीता तुमकुर ग्रामीण टिकट के लिए दबाव बनाएंगी। कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘हमारे बीच भ्रम की कोई स्थिति नहीं है, हासन मुद्दे पर भी कोई भ्रम नहीं है। एक और चीज जो मैंने एक अखबार में और एक टीवी पर भी देखी, वह यह है कि वे अनीता कुमारस्वामी का नाम लेकर आए हैं।’’
उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘‘मैं यह हाथ जोड़कर कह रहा हूं। मेरे द्वारा अनीता कुमारस्वामी को तीन चुनावों में चुनाव लड़ाने का कारण यह था कि उन सीटों पर पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं था। पार्टी के गौरव को बचाने के लिए मैंने उन्हें राजनीति में उतारा और उन्हें चुनाव लड़ाया।’’ हासन सीट को लेकर परिवार के भीतर मतभेदों के बीच मीडिया की खबरों ने कुमारस्वामी को परेशान कर दिया है। यह मुद्दा विवाद का विषय बन गया है, कुमारस्वामी के बार-बार यह स्पष्ट करने के बावजूद भी भवानी के रुख में नरमी नहीं आयी है कि उन्हें मैदान में नहीं उतारा जाएगा। कुमारस्वामी ने कहा कि इसके बजाय पार्टी के एक ‘‘निष्ठावान कार्यकर्ता’’ को मैदान में उतारा जाएगा। हासन जिला पंचायत की पूर्व सदस्य भवानी रेवन्ना कुमारस्वामी के बड़े भाई और पूर्व मंत्री एच डी रेवन्ना की पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री एवं पार्टी संरक्षक एच डी देवेगौड़ा की बहू हैं। उन्हें उनके पति और बेटों- प्रज्वल और सूरज रेवन्ना का समर्थन प्राप्त है, जो क्रमशः हासन से लोकसभा सदस्य और विधानपरिषद सदस्य हैं।
कुमारस्वामी ने कहा कि अनीता कुमारस्वामी ने कभी भी परिवार की छवि और नाम को नुकसान पहुंचाने का कोई प्रयास नहीं किया, उन्हें अब चुनाव लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है और वह चुनावी राजनीति से दूर हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनका (राजनीति में) दुरुपयोग किया था जब पार्टी के गौरव को बचाने के लिए पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं था … राजनीति में कुछ हासिल करने की उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं हैं। वह बेटे के पक्ष में चुनावी राजनीति से दूर रही हैं।’’
हासन टिकट विवाद से परिवार में दरार पड़ने के संकेतों के बीच देवेगौड़ा ने रविवार को अपने दोनों बेटों और भवानी के साथ चर्चा की और ऐसा प्रतीत होता है वह गतिरोध दूर करने में विफल रहे हैं। कुमारस्वामी और रेवन्ना दोनों ने कहा है कि हासन टिकट के मुद्दे पर देवेगौड़ा का फैसला अंतिम होगा।अनीता वर्तमान में रामनगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं जहां से उनके बेटे निखिल कुमारस्वामी आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवार हैं।
निखिल ने अपनी मां के चुनाव लड़ने की खबरों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘इस तरह का कोई सवाल ही नहीं है। मेरी मां ने चुनावी राजनीति से दूर रहने का फैसला किया है… मैं जरूरत पड़ने पर चुनाव लड़ने से पीछे हटने और पार्टी के लिए काम करने के लिए भी तैयार हूं।’’अभिनेता से नेता बने निखिल जद (एस) की युवा शाखा के प्रमुख हैं और उन्होंने मांड्या से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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