मोदी नीत भारत सरकार के सहयोग से श्रीलंका ने अधिकतर समस्याओं का कर लिया है हल: राजपक्षे

नागपुर, श्रीलंका के मंत्री विजयदासा राजपक्षे ने अपने देश में आर्थिक और राजनीतिक संकट के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत भारत सरकार के सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीलंका सरकार जल्द ही सत्य एवं सुलह आयोग गठित करेगी, ताकि द्विपीय देश में सभी समुदायों की आपसी सहमति से लंबे समय से लंबित शांति को बहाल किया जा सके।
मंत्री ने कहा कि श्रीलंका सरकार दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद तमिल लोगों और नेताओं से नियमित रूप से संवाद कर रही है। श्रीलंका के न्याय मंत्री राजपक्षे ने शनिवार को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित शांति सम्मेलन के इतर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हमनें अपनी अधिकतर समस्याओं का समाधान प्रधानमंत्री मोदी नीत भारत सरकार से मिले समर्थन से कर लिया है। हमें श्रीलंका में जल्द ही समान्य स्थिति बहाल हो जाने की उम्मीद है।’’
श्रीलंका पिछले साल अभूतपूर्व आर्थिक संकट में घिर गया था, जिसके बाद राजनीतिक उठापटक की स्थिति उत्पन्न हुई एवं शक्तिशाली राजपक्षे परिवार को सत्ता से पदच्युत होना पड़ा।
श्रीलंका में यह संकट पैदा होने के बाद, रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व में सरकार बनी, जिस पर देश की अर्थव्यस्था को स्थिर करने की जिम्मेदारी है।
राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंका ने 30 साल तक गृहयुद्ध का गवाह रहा है जिसमें करीब 60 हजार लोगों की जान गई।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने युद्ध प्रभावित लोगों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं। हमने वर्ष 2016 में प्रक्रिया शुरू की और लापता लोगों, शांति स्थापना और सुलह के लिए कार्यालय खोला।’’ वह श्रीलंका में जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों की शिकायत, कथित अन्याय एवं भेदभाव और श्रीलंकाई न्याय प्रणाली की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘श्रीलंका सरकार सत्य एवं सुलह आयोग का गठन करेगी। हम सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि लंबे समय से लंबित शांति को सभी समुदायों की आम सहमति से बहाल किया जाए।’’
राजपक्षे ने कहा, ‘‘हमने कई मुद्दों का समाधान किया है। कई मुकदमे और जेल में कई कैदी हैं। हालांकि, अब ये मामले बहुत कम हो गए हैं। श्रीलंका सभी मुद्दों का सभी कोणों से समाधान कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि श्रीलंका सरकार समझौते तक पहुंचने और मुद्दों का समाधान करने के लिए तमिल समुदाय के साथ बातचीत कर रही है।
मंत्री ने कहा, ‘‘हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे तमिल समुदाय के लोगों और नेताओं से लगातार संवाद कर रहे हैं। अब सभी ने शांति स्थापना का समर्थन किया है। उन्होंने विशेष तौर पर कहा है कि श्रीलंका में सभी को इसका (युद्ध का)खामियाजा भुगतना पड़ा है और यह देश के किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार का रुख है कि इन समस्याओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए नहीं छोड़ना है।
मंत्री ने कहा, ‘‘हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारे देश में सभी श्रीलंकाई, चाहे वे मुस्लिम, तमिल या सिंघली हों, शांति से श्रीलंकाई पहचान के साथ रहें। हमें उम्मीद है कि हम इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।’’
राजपक्षे ने महामारी के बाद आर्थिक संकट से निपटने के प्रयासों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने सत्ता संभाली तो अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही थी, महंगाई दर 97 प्रतिशत थी। हम बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। जब सत्ता में आए तो हमारे पास 20 लाख अमेरिकी डॉलर भी नहीं थे और यह सच्चाई हमने जनता से साझा की।’’
मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य महंगाई दर को एकल अंक में लाना, लोगों के लिए भोजन, कोयला और गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना और विदेशी मुद्रा भंडार को पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना था।
उन्होंने कहा, ‘‘हम महंगाई दर 21 प्रतिशत तक लाने में सफल रहे। लोगों को अब बिजली कटौती और कोयले की कमी का सामना करना नहीं पड़ रहा। आवश्यक वस्तुएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। हमारा विदेश मुद्रा भंडार 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर है और इसके पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।’’
राजपक्षे ने कहा कि सरकार ने देश में राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को स्थिर किया है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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