मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘आतंकवाद विरोधी सम्मेलन-2024’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है।शाह ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से 10 वर्षों में भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के ‘आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ के नारे को न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व ने स्वीकार किया है। पिछले 10 वर्षों में भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए एक मजबूत ‘इकोसिस्टम’ का निर्माण किया गया है। शाह ने कहा कि हालांकि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है, लेकिन अगर हम पिछले 10 वर्षों में किए गए कार्यों का अवलोकन करें तो इसे संतोषजनक माना जा सकता है। गृह मंत्री ने यह भी घोषणा की कि गृह मंत्रालय आतंकवाद, आतंकवादियों और उन्हें समर्थन देने वाले पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से लड़ने के लिए जल्द ही एक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति पेश करेगा।केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एनआईए सिर्फ एक जांच एजेंसी नहीं है और इसके तत्वावधान में देश भर में आतंकवाद विरोधी गतिविधियों को संकलित और प्रचारित किया जाना चाहिए और ऐसे उपाय किए जाने चाहिए जिससे जांच एजेंसी अदालत में मजबूती से खड़ी हो और आतंकवाद विरोधी तंत्र मजबूत हो। अमित शाह ने कहा कि आज 11 पदक विजेताओं को भी सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के बाद से 75 वर्षों में 36,468 पुलिसकर्मियों ने देश की सुरक्षा बनाए रखने के लिए आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। अमित शाह ने कहा कि राज्यों की अपनी भौगोलिक और संवैधानिक सीमाएं होती हैं, जबकि आतंकवाद और आतंकवादियों की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि आतंकवादी अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय दोनों तरह के षड्यंत्रों में शामिल होते हैं और उनके खिलाफ प्रभावी रणनीति विकसित करने के लिए हमें इस तरह के सम्मेलनों के माध्यम से एक मजबूत प्रणाली बनाने की जरूरत है। इससे आतंकवाद, नारकोटिक्स और हवाला कारोबार जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी, जो देश की सीमाओं और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन न केवल चर्चा का मंच बनेगा बल्कि ऐसे कार्रवाई योग्य बिंदु भी सामने लाएगा जो आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों की वास्तविक उपयोगिता कार्रवाई योग्य बिंदुओं को थाने और बीट स्तर तक ले जाने में है। बीट अधिकारियों से लेकर एनआईए के महानिदेशक तक पूरे तंत्र को आतंकवाद से उत्पन्न खतरों के बारे में सफलतापूर्वक जागरूक किया जाना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2020 में आतंकवाद के वित्तपोषण को नियंत्रित करने के लिए 25 सूत्री एकीकृत योजना बनाई गई, जिसमें जिहादी आतंकवाद से लेकर पूर्वोत्तर, वामपंथी उग्रवाद, नकली मुद्रा से लेकर नशीले पदार्थों तक के उपाय शामिल हैं। एफसीआरए से लेकर कट्टरपंथ के वित्तपोषण से लेकर अवैध हथियारों की तस्करी तक, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से ‘इकोसिस्टम’ को तोड़ने का काम किया गया और इसके बहुत अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने कहा कि मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। शाह ने बताया कि नेशनल मेमोरी बैंक की स्थापना की गई और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कदम उठाए गए। खुफिया सूचनाओं पर आधारित एक केंद्रीय डेटाबेस भी बनाया गया। उन्होंने कहा कि कई डेटाबेस विकसित किए गए हैं, जो आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के प्रयासों में मददगार हो सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री ने कहा कि 15 से अधिक संगठनों को आतंकवादी संगठन और गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है और हाल ही में सात और संगठनों को आतंकवादी संगठन और गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है।https://x.com/AmitShah/status/1854536956736356768/photo/4

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