जयपुर, राजस्थान के कोटा में छात्रों के आत्महत्या की बार-बार होने वाली घटनाओं ने देश के कोचिंग हब को एक बड़ा झटका दिया। आत्महत्याओं की घटनाओं से कोचिंग हब की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिला। इसकी सालाना 6 500-7000 करोड़ रुपये की आय घटकर 3 000-3 500 करोड़ रुपये रह गई। कई लोगों ने सवाल उठाया था कि क्या भाजपा द्वारा बहुत कम अनुभव वाले भजनलाल शर्मा पर भरोसा करना और अनुभवी वसुंधरा राजे को हाशिये पर छोड़कर आगे बढ़ना पार्टी और राज्य के लिए नुकसानदेह होगा कांग्रेस के बारे में भी सवाल थे। ऐसी अफवाहें थीं कि पार्टी के भीतर की कलह के कारण विधानसभा चुनावों में हार हुई और लोकसभा चुनावों में भी इसका नुकसान हो सकता है।
राजस्थान के लोग जीवन के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं लेकिन एक गंभीर मुद्दा 2024 में भी चर्चा का विषय रहा: कोटा में छात्रों की आत्महत्या। रिपोर्ट के अनुसार शहर में मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सत्रह छात्रों ने इस साल आत्महत्या कर ली।
कोटा जिला कलेक्टर रविंद्र गोस्वामी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं और 2023 से आत्महत्याओं की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी आई है।
आत्महत्याओं की खबरों ने कोचिंग सिटी के रूप में कोटा की छवि को आघात पहुंचाया और इसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान झेलना पड़ा ।इसका असर आंकड़ों में दिखाई देता है।
उद्योग जगत के लोगों के अनुसार शहर में पहले हर साल करीब 2 लाख छात्र आते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर 85 000 से 1 लाख रह गई है और अर्थव्यवस्था 6 500-7 000 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व से लगभग आधी हो गई है।
विशेषज्ञों ने छात्रों की घटती संख्या के लिए अन्य कारणों का भी हवाला दिया है जैसे पंजीकरण पर केंद्र के नए दिशा-निर्देश और प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों द्वारा अन्य प्रमुख शहरों में अपनी शाखाएं खोलना। गोस्वामी ने कहा कि प्रशासन ने संकट में फंसे छात्रों को जोड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं और उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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