विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा नई दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) के दफ़्तर के बाहर सात घंटे का धरना देने के बाद एक FIR दर्ज की गई। यह धरना 20 जुलाई को संसद तक मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर दिया गया था।
इससे पहले, गांधी ने कहा कि वह साहिल लोचब को लगी चोटों के मामले में FIR दर्ज कराने के लिए संसद मार्ग स्थित DCP दफ़्तर गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने साहिल पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जबकि वह 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहा था। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी एक आँख की रोशनी जाने का ख़तरा पैदा हो गया।
गांधी ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के ख़िलाफ़ की गई इस कथित कार्रवाई को ग़ैर-कानूनी और गंभीर अपराध बताया। उन्होंने इस घटना को लेकर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि शुरू में साहिल को FIR दर्ज नहीं करने दी जा रही थी।
गांधी के सात घंटे के धरने के बाद, पुलिस ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में FIR दर्ज की।
FIR दर्ज होने पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी ने इसे “न्याय की दिशा में पहला कदम” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि FIR दर्ज करने की अनुमति भी गृह मंत्रालय से लेनी पड़ी थी। गांधी ने कहा कि न्यायिक जाँच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि साहिल और पीड़ित अन्य छात्रों को न्याय दिलाया जाएगा।