शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य पाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति

नयी दिल्ली, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने उद्योग जगत से भारत के 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए विचारों और संभावनाओं के लिए विश्वविद्यालयों तकनीकी संस्थानों तथा शोधकर्ताओं के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया।

राधाकृष्णन ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए नई पीढ़ी से यह सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया कि देश में बिजली की बढ़ती मांग को स्वच्छ विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा से पूरा किया जाए और साथ ही पर्यावरण को पहले से बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह इस पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि परिवहन उद्योग कृषि घरों और रसोई में बिजली के बढ़ते उपयोग के कारण 2070 तक देश की बिजली खपत करीब सात गुना बढ़ सकती है।

उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ अरब की आबादी और बढ़ती आकांक्षाओं वाले देश की ऊर्जा जरूरतें पुराने तरीकों पर चलते हुए पूरी नहीं की जा सकतीं। राधाकृष्णन ने कहा ‘‘उद्योग जगत को भारत के 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए विचारों और संभावनाओं के लिए विश्वविद्यालयों तकनीकी संस्थानों तथा शोधकर्ताओं के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

आने वाला दशक यह तय करेगा कि दुनिया जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में बनी रहती है या नहीं। वर्ष 2040 की प्रौद्योगिकियां आज की प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप से आएंगी। उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक यानी जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

उपराष्ट्रपति के अनुसार कोई भी अभियान केवल सरकार के प्रयासों से सफल नहीं होता। इसके लिए पढ़ाने वाले शिक्षक सीखने वाले विद्यार्थी नए उद्यम खड़े करने वाले उद्यमी और अपनी आदतों में बदलाव लाने वाले नागरिक भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ की भावना के अनुरूप ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग सोच-समझकर ऊर्जा की खपत और कचरे का जिम्मेदारी से निपटान संस्थागत प्रयासों को मजबूती देते हैं। एक अरब लोगों के छोटे-छोटे फैसले भी एक नए बिजली संयंत्र जितना महत्व रख सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 65 लाख से अधिक परिवार अब खुद बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। यह योजना परिवारों को अपनी जीवनशैली बेहतर बनाने और सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा का लाभ उठाने में सक्षम बना रही है। राधाकृष्णन ने कहा कि इस योजना से देशभर में बिजली मिस्त्रियों तकनीशियन और विक्रेताओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इससे स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव आर्थिक अवसरों और परिवारों की समृद्धि का माध्यम बन रहा है। राधाकृष्णन ने कहा कि किसान हों या परिवार युवा हों या महिलाएं हर वर्ग अपने पेशे कारोबार और जीवन में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित हो रहा है।

उन्होंने कहा ‘‘हमारी गैर-जीवाश्म (स्वच्छ) ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट से अधिक हो गई है। हमने 2025 में ही गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता का 50 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जो तय समयसीमा से पांच साल पहले है। पिछले करीब एक दशक में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 170 गीगावाट से अधिक हो गई है जो उस समय तीन गीगावाट से भी कम थी। कभी कोयले से कई गुना महंगी सौर ऊर्जा अब देश में बिजली के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक है।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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