संयुक्त राष्ट्र अपरिहार्य है, इसे अधिक उत्तरदायी बनने की जरूरत: थरूर

नयी दिल्ली/केप टाउन,  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि गाज़ा और यूक्रेन को लेकर भले ही संयुक्त राष्ट्र “विफल” रहा हो  लेकिन यह वैश्विक निकाय अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में जब सैद्धांतिक रूप से वैश्विक सहयोग की पहले से अधिक आवश्यकता है  तो संयुक्त राष्ट्र के लिए यह चुनौती है कि वह अधिक उत्तरदायी और प्रतिनिधिक बने।

             संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव रह चुके थरूर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अलग-अलग छोड़ने का मतलब मानवता की साझा भावना को ही छोड़ देना है।

             तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य थरूर ने दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में 15वें डेसमंड टूटू अंतरराष्ट्रीय शांति व्याख्यान में कहा  “हमें संयुक्त राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से स्थापित करने की ज़रूरत है। मैंने 1978 से 2007 तक तीन दशकों तक संयुक्त राष्ट्र में काम किया और प्रत्यक्ष रूप से देखा कि कैसे यह शीत युद्ध के बाद रणक्षेत्र से बदलकर वैश्विक सहयोग की प्रयोगशाला बन गया।”

             उनका कहना था   मैं शरणार्थियों की रक्षा के प्रयासों और शांति स्थापित करने के संघर्षों का हिस्सा रहा। मैंने संयुक्त राष्ट्र को रवांडा में खराब स्थिति में देखा  लेकिन तिमोर-लेस्ते और नामीबिया में उसकी सफलता भी देखी। मैंने उसे नौकरशाही और राजनीति से जूझते देखा  फिर भी वह भूखों को खाना देने  विस्थापितों को आश्रय देने और कमजोरों को आवाज़ देने के अपने मिशन पर कायम रहा।

             थरूर ने कहा   आज जब लोग गाज़ा और यूक्रेन को लेकर उसकी विफलताओं की आलोचना करते हैं  मैं फिर कहता हूँ कि संयुक्त राष्ट्र पूर्ण नहीं है  न ही उसे परिपूर्ण होने के लिए बनाया गया था  फिर भी यह अपरिहार्य है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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