अपदस्थ प्रधानमंत्री ओली के समर्थकों और ‘जेन जेड’ युवाओं का काठमांडू में हुआ आमना-सामना

काठमांडू, नेपाल के ‘जेन जेड’ युवा और अपदस्थ प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाले सीपीएन-यूएमएल के समर्थकों का एक बार फिर राजधानी काठमांडू में आमना-सामना हुआ जबकि कुछ दिन पहले ही उनके बीच झड़प के कारण बारा जिले में कर्फ्यू लगाना पड़ा था।

‘जेन जेड’ समूह के दर्जनों घायल युवकों ने शुक्रवार को काठमांडू के माइतीघर मण्डला में पूर्व प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ धरना दिया। वे आठ सितंबर को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए ओली को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जिसमें 76 लोग मारे गए थे।

शुक्रवार का प्रदर्शन निकटवर्ती बानेश्वर-बबरमहल क्षेत्र में सीपीएन-यूएमएल की रैली के बाद हुआ जहां पार्टी प्रमुख ओली ने यूएमएल नेताओं और कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने के लिए ‘नेशनल वोलेंटियर्स फोर्स’ के गठन की घोषणा की। यूएमएल कार्यकर्ताओं और ‘जेन जेड’ युवाओं दोनों के कार्यक्रम लगभग एक ही स्थान पर और एक ही समय आयोजित किये गए थे तथा उनके बीच किसी भी टकराव को टालने के लिए बड़ी संख्या में दंगा रोधी पुलिसकर्मी तैनात किये गए थे। ‘जेन जेड’ वे युवा हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ था।

एक दिन पहले ‘जेन जेड’ के युवाओं और ओली की पार्टी के सदस्यों के बीच झड़प में 10 लोग घायल हो गए जिसके बाद तनाव फैल गया था। इसके बाद अधिकारियों को भारत की सीमा से लगे नेपाल के बारा जिले में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा था। हालांकि शुक्रवार को कर्फ्यू हटा लेने के बाद बारा ज़िले में जनजीवन पटरी पर लौट आया। पुलिस द्वारा सीपीएन-यूएमएल के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के बाद स्थिति नियंत्रण में आई जो बुधवार को सिमरा हवाई अड्डे पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे ‘जेन जेड’ युवाओं की पिटाई में शामिल थे।

ओली के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल इन दिनों ‘जेन जेड’ युवाओं के निशाने पर है। पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पार्टी के युवा नेता महेश बसनेत सहित कुछ यूएमएल नेताओं द्वारा ‘जेन जेड’ के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों और शत्रुतापूर्ण टिप्पणियों के कारण ऐसा हुआ है।

नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों ने जहां ‘जेन जेड’ के प्रति नरम रुख अपनाया है और 5 मार्च को आम चुनाव कराये जाने का स्वागत किया है। वहीं ओली की पार्टी ने आम चुनाव का विरोध किया है। ओली की पार्टी नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को बहाल करने के लिए अभियान चला रही है तथा प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के इस्तीफे की मांग कर रही है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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