नयी दिल्ली, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों के बोझ कम करने और चिकित्सक-रोगी संबंधों को मजबूत करने की क्षमता है।
भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव के लिए एआई का विस्तार: सार्वजनिक-निजी भागीदारी विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय सामूहिक परिचर्चा में श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली राष्ट्रीय स्तर पर अंतर-संचालनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में विकसित हुई है।
एक प्रमुख भागीदार मंत्रालय के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय उच्चस्तरीय सामूहिक परिचर्चा प्रमुख पहल की शुरुआत और अपने समर्पित प्रदर्शनी स्टॉल पर एआई-संचालित स्वास्थ्य सेवा समाधानों के प्रदर्शन के माध्यम से शिखर सम्मेलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली पिछले एक दशक में रिकॉर्ड के बुनियादी डिजिटलीकरण और बेहतर डेटा रिपोर्टिंग से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अंतरसंचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण तक विकसित हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित हो चुका है जिसमें 85.9 करोड़ से अधिक ‘आभा’ खाते और 87.8 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड जुड़े हुए हैं। देशभर में 1.80 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं और प्राथमिक देखभाल स्तर पर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को एकीकृत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तंत्र जानकारी के संग्रहण और प्रसारण को सक्षम बनाते हैं जबकि एआई से सटीक व्याख्या और कार्रवाई में मदद मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई के पास चिकित्सक-रोगी संबंधों को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल पर बोझ कम करने की क्षमता है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common