तिरुवनंतपुरम, केरलम सरकार पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील मुनरो द्वीप के लिए पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका को प्राथमिकता देते हुए पर्यावरण अनुकूल पर्यटन, पश्यजल (बैक वॉटर) और विरासत से जुड़ी पहल पर विचार कर रही है।
राज्य के मंत्री पी सी विष्णुनाध ने बुधवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।कोल्लम शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित इस द्वीप को मुनरो थुरुथ के नाम से भी जाना जाता है। इसका नाम कर्नल जॉन मुनरो के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने तत्कालीन त्रावणकोर रियासत में ब्रिटिश प्रतिनिधि और प्रशासनिक प्रमुख के रूप में कार्य किया था।विधायक उल्लास कूवूर के एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि कोल्लम जिले में स्थित मुनरो द्वीप छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है, जो अष्टमुडी झील और कल्लदा नदी से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि अपने इतिहास, विरासत, जैव विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक ग्रामीण जीवन के कारण मुनरो द्वीप में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं।राज्य के पर्यटन मंत्री ने कहा कि सरकार द्वीप के पश्चजल, आर्द्रभूमियों, ज्वारीय वनों और प्रवासी पक्षियों के रहवास पर केंद्रित पर्यटन संबंधी पहल पर विचार कर रही है।
मंत्री ने विधानसभा को आश्वासन दिया कि वह मुनरो द्वीप का दौरा करेंगे और भविष्य की विकास योजनाएं तैयार करने के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे।इससे पहले, कूवूर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद द्वीप में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि व्यापक विकास योजना के अभाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण पर्यटन को बढ़ावा देने में बाधा आ रही है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common