पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने अपनी पुस्तक में जीवन के 100 अनकहे किस्से साझा किए

नयी दिल्ली,  पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने अपनी नयी पुस्तक में अपने जीवन के 100 ऐसे प्रसंग साझा किए हैं  जो इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि देश की संस्थाएं किस तरह काम करती हैं  फैसले कैसे लिए जाते हैं और भारतीय शासन-व्यवस्था जैसी जटिल प्रणाली में लोग किस प्रकार अपनी भूमिका निभाते हैं।

             कुरैशी की पुस्तक ‘इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज़  नॉट ए मेमॉयर’ का आयोजित एक समारोह में विमोचन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उन्होंने आत्मकथा लिखने के बजाय ऐसी पुस्तक लिखना बेहतर समझा  क्योंकि उनके अनुसार वह इतने महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हैं कि अपनी आत्मकथा लिखें।

            उन्होंने कहा  “यह बनावटी विनम्रता नहीं  बल्कि मेरे मन की सच्ची भावना है। फिर भी  मेरे जीवन में ऐसे कई अनुभव और यादें हैं  जिन्हें साझा किया जाना चाहिए। यह विचार सबसे पहले मेरे मन में प्रतिष्ठित शिक्षाविद और कवि नवाज देवबंदी ने डाला था।’’

            कुरैशी ने कहा  “एक रात करीब 11 बजे उनका फोन आया। उन्होंने कहा  ‘कुरैशी साहब  आपने बहुत अच्छा काम किया है। मेरा सुझाव है कि आप अपने जीवन के 100 अलग-अलग प्रसंगों पर एक किताब लिखिए।’ उनका यह सुझाव मेरे मन में घर कर गया और इसी ने इस पुस्तक का आधार तैयार किया।”

            हैशेट इंडिया द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में कुरैशी ने अपने जीवन के सौ रोचक प्रसंगों के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान सामने आए घटनाक्रम  दुविधाओं और अप्रत्याशित मोड़ों का जीवंत चित्रण किया है।

            पुस्तक में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का भी बेबाक उल्लेख किया है। कुरैशी 1971 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी बने। बाद में उन्हें देश का  17वां मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल में मतदाता शिक्षा प्रभाग  व्यय निगरानी प्रभाग और भारतीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय संस्थान (आईआईआईडीईएम) जैसी महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गईं।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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