प्रधानमंत्री मोदी ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल से बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एशियाई पैरा गेम्स 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय दल से मुलाकात की। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ हफ्ते पहले एशियाई खेलों के दल से मिलने के बाद, वे पैरा-एशियाई खेलों के खिलाड़ियों से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह दिखाता है कि भारत एक बड़ी वैश्विक खेल शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। 140 करोड़ देशवासियों की ओर से खिलाड़ियों को बधाई देते हुए और उनके परिवारों, प्रशिक्षकों तथा कोचों के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों ने न केवल बड़े मंच पर पदक जीते हैं, बल्कि पूरे देश के करोड़ों लोगों का दिल भी जीता है।

प्रधानमंत्री ने पिछले दौर का जिक्र करते हुए बताया कि पहले खेलों में भारत की भागीदारी को महज एक औपचारिकता माना जाता था और पैरा-खेलों में देश काफी पीछे था – 2010 के पैरा एशियाई खेलों में भारत ने केवल एक स्वर्ण सहित कुल 14 पदक जीते थे। उन्होंने इस बार भारतीय दल की ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित किया, जिसमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदकों के साथ कुल 114 पदक जीते गए। इसके अलावा, खिलाड़ियों ने पांच विश्व रिकॉर्ड और नौ एशियाई रिकॉर्ड भी बनाए।

प्रधानमंत्री ने बताया कि 56 महिला खिलाड़ियों में से 34 ने पदक जीते, चार स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम के तीनों स्थानों पर कब्जा किया, और अकेले आखिरी दिन ही भारतीय दल ने नौ स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने टूर्नामेंट के अंत तक जीतते रहने के खिलाड़ियों के जज्बे की तारीफ की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “14 से 114 पदकों तक का यह सफर आपकी कड़ी मेहनत का बेहतरीन परिणाम है।”प्रधानमंत्री ने उन कई स्पर्धाओं का विशेष उल्लेख किया जिनमें भारतीय खिलाड़ियों ने पहली बार स्वर्ण पदक जीते—इससे पहले इन खेलों में भारत को कभी सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने बताया कि मोना अग्रवाल ने पैरा शूटिंग में विश्व रिकॉर्ड बनाया, जबकि हनी ने अपना ही पिछला विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हिमांशु, रवि और जेहान ने अपने प्रदर्शन से दुनिया को दिखाया कि शारीरिक चुनौतियों को कैसे हराया जा सकता है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भले ही किसी व्यक्ति या टीम की शानदार जीत को देखती है, लेकिन सफलता की यह विशाल इमारत बरसों की अनदेखी मेहनत, पसीने और अटूट तपस्या पर टिकी होती है। उन्होंने एथलीट रिंकू का जिक्र किया, जिन्होंने एशियन पैरा गेम्स से ठीक दो महीने पहले अपनी माँ को खोने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। स्वर्ण पदक जीतने के बाद, उन्होंने अपनी माँ की तस्वीर उठाकर उन्हें याद किया और सम्मान दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “उस पल ने हम सभी को भावुक कर दिया।”एथलीटों के संघर्ष और जीत को बेहद प्रेरणादायक बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके व्यक्तिगत सफर और देश के विकास के सफर में काफी समानता है।

मोदी ने कहा, “आज आपके प्रयास और देश के प्रयास मिलकर एक ऐसी ताकत बन रहे हैं, जिसे कोई रोक नहीं सकता।”प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह इन एथलीटों ने मुश्किलों के आगे हार नहीं मानी, उसी तरह देश ने भी अपनी व्यवस्था को बदलने का संकल्प लिया है, ताकि युवाओं की प्रतिभा बर्बाद न हो। इससे युवा खिलाड़ियों में यह भरोसा जगा है कि पूरा देश मजबूती से उनके साथ खड़ा है। उन्होंने तीरंदाजी, एथलेटिक्स, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, जूडो और पावरलिफ्टिंग में भारत के बढ़ते दबदबे का जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि एशियन पैरा गेम्स में पहली बार हिस्सा लेने वाले 61 खिलाड़ियों में से 36 ने पदक जीते, और संदीप ने तो अपने पहले ही टूर्नामेंट में विश्व रिकॉर्ड बना दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “युवाओं की यह भागीदारी आज के भारत की तस्वीर भी है और भविष्य के भारत का ऐलान भी।”प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार खेलों को केवल राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के रूप में नहीं देखती, बल्कि इसे व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण के एक अहम माध्यम के रूप में देखती है।मंत्री ने कहा कि एथलेटिक्स युवाओं को जीवन के जरूरी मूल्य सिखाता है। मोदी ने कहा, “खेल ही युवाओं को हार के बाद जीतना सिखाते हैं, और अनुशासन तथा टीम भावना का अर्थ समझाते हैं।”

प्रधानमंत्री ने स्कूल और जमीनी स्तर के अभियानों, कई ‘खेलो इंडिया’ केंद्रों और ‘TOPS’ (टॉप्स) योजना के तहत ओलंपिक-स्तर के प्रशिक्षण के जरिए एक आधुनिक खेल इकोसिस्टम बनाने के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने लाल किले से की गई अपनी उस अपील को याद दिलाया, जिसमें उन्होंने युवाओं को ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए एक राष्ट्रव्यापी प्रतिभा खोज अभियान में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा, “इसी विजन के साथ, हम देश के लिए एक आधुनिक खेल इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं।”प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन राष्ट्रीय पहलों में पैरा-स्पोर्ट्स को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि एथलीट बड़े वैश्विक आयोजनों में शानदार प्रदर्शन कर सकें।

उन्होंने हाल ही में हुए टूर्नामेंट में मिले ठोस नतीजों की ओर इशारा करते हुए कहा, “इस प्रतियोगिता में, TOPS से मदद पाने वाले खिलाड़ियों ने 41 पदक जीते और ‘खेलो इंडिया’ के खिलाड़ियों ने 19 पदक जीते। इससे पता चलता है कि हमारे प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की आधुनिक खेल नीतियां खेल के मैदान के बाहर भी युवाओं के लिए व्यापक अवसर पैदा कर रही हैं। उन्होंने खेल बुनियादी ढांचे के निर्माण, उपकरणों के निर्माण और प्रसारण (ब्रॉडकास्टिंग) अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार का जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज भारत की आधुनिक खेल नीतियां, खेल की दुनिया में युवाओं के लिए मैदान के बाहर भी कई नए अवसर पैदा कर रही हैं।

“प्रधानमंत्री ने 1,800 करोड़ रुपये से अधिक की ‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ को हाल ही में मिली मंजूरी का जिक्र किया। उन्होंने घरेलू खेल उपकरण निर्माता उद्योग से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि दुनिया भर के एथलीट ‘मेड इन इंडिया’ (भारत में बने) उपकरण, कपड़े और जूते पहनकर मैदान में उतरें। इससे MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) मजबूत होंगे और छोटे शहरों तथा ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मोदी ने जोर देकर कहा, “हम चाहते हैं कि भारत न केवल विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार करे, बल्कि विश्व स्तरीय खेल उपकरणों का निर्माण भी करे।” प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों के अपने आगामी दौरों के दौरान युवाओं को खेल के मैदान में जीत हासिल करने और खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के बारे में मार्गदर्शन दें।

साथ ही, उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए सरकार की पहलों का जिक्र करते हुए हाल ही में कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसलों के बारे में बताया। इनमें दिव्यांग पेंशन में बढ़ोतरी, पात्रता की सीमा को 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करना, और पेंशन का लाभ 18 साल की उम्र के बजाय जन्म से ही देना शामिल है। इसके अलावा, 10,000 शब्दों का ‘भारतीय सांकेतिक भाषा शब्दकोश’ (Indian Sign Language dictionary) तैयार करना, सांकेतिक भाषा वाली स्कूली किताबें उपलब्ध कराना और ‘सुगम्य भारत अभियान’ के तहत सार्वजनिक स्थानों को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारी कोशिश है कि देश के हर दिव्यांग भाई-बहन को सम्मान मिले, समान अवसर मिलें और वे अपनी क्षमताओं के दम पर जीवन में आगे बढ़ सकें।”प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को याद दिलाया कि ‘आइची-नागोया’ (Aichi-Nagoya) पोडियम कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक शुरुआती पड़ाव है। भारत की नजर अब ‘लॉस एंजिल्स 2028 खेलों’ पर है, जिसके लिए अवनि और मनीष पहले ही कोटा हासिल कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से अपनी जीत का जश्न मनाने और 2028 में रिकॉर्ड भागीदारी सुनिश्चित करने तथा ज्यादा से ज्यादा पदक जीतने की तैयारी तुरंत शुरू करने को कहा। अंत में उन्होंने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा, “पूरा देश आपके साथ है और आपकी अगली जीत का इंतजार कर रहा है।”https://x.com/khadseraksha/status/2118358551273914764/photo/1

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