नयी दिल्ली, भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर को बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी करार देते हुए बुधवार को कहा कि उनकी पृष्ठभूमि बेहद विनम्र रही है।
सीजेआई ने करीब छह साल तक शीर्ष अदालत में सेवा देने वाले न्यायमूर्ति नजीर के विदाई समारोह में कहा, “इसलिए आज, हम एक समर्पित बेटे, एक कॉलेजियम सहयोगी, एक सज्जन नियोक्ता, एक प्रखर वकील और लोगों के न्यायाधीश को विदाई दे रहे हैं।”
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, “वह (न्यायमूर्ति नजीर) दिल से एक किसान हैं और उन्होंने अपने चाचा के खेत पर पले-बढ़े हैं। भाई नज़ीर के लिए यह एक कठिन जीवन था। आप सभी को यह जानकर बहुत दुख होगा कि अपने शुरुआती वर्षों में पनमबुर समुद्र तट (मेंगलुरु में) में न्यायमूर्ति नज़ीर ने मछलियां भी इकट्ठी की थी। इसलिए, न्यायमूर्ति नज़ीर के लिए यह एक लंबी यात्रा रही है।”
सीजेआई ने कहा, “तो कुल मिलाकर, अदालत में हम जो मुस्कान देखते रहे, वह एक बहुआयामी व्यक्तित्व को प्रकट करती है। यह एक ऐसे व्यक्तित्व को प्रकट करती है, जो कानून के बारे में बहुत गंभीर है, लेकिन साथ ही उससे परे भी है। साहित्य के शौकीन, संगीत के शौकीन, मुझे लगता है कि इस दृष्टि से यह व्यक्तित्व एक पूर्ण मानव का प्रतिनिधित्व करती है।”
उन्होंने कहा कि वकालत पेशे से जुड़ने के बाद न्यायमूर्ति नज़ीर ने मई 2003 में एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने से पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय में 20 वर्षों तक वकालत की और 2017 में उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत होने से पहले उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में 14 शानदार वर्षों तक सेवा की।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं एक प्रिय मित्र को विदाई दे रहा हूं। जब वह आज मेरे साथ अदालत में बैठे तो यह एक बड़ा सम्मान था, लेकिन साथ ही साथ हर मिनट के साथ दुख की भावना थी, क्योंकि मैं जानता था कि हमारे पास आज सुबह बेंच में जो ढाई घंटे थे उसमें से हर मिनट कम होता जा रहा था।”
उन्होंने न्यायमूर्ति नज़ीर के प्रारंभिक जीवन के बारे में कई रोचक तथ्य साझा किए, जिनमें कॉलेज के दिनों में थिएटर के प्रति उनका लगाव, महिलाओं की आवाज़ में गायन, नाटक लिखना और उनका ‘स्वयंवर’ (एक विधि विवाह जहाँ एक महिला एक पुरुष को अपने पति के रूप में चुनती है) शामिल था। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति नजीर के ससुर ने स्वयंवर का आयोजन किया था।
सीजेआई ने कहा कि न्यायमूर्ति नज़ीर ने प्रशासनिक कानून, बीमा, परिवार कानून, भूमि कानून, पर्यावरण, मोटर दुर्घटना दावों जैसे कानून के अलावा अन्य क्षेत्रों के न्यायशास्त्र में भी बहुत योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि जो लोग न्यायमूर्ति नज़ीर के करीबी हैं, वे जानते हैं कि वह बहुत कुछ लिखते हैं और वह डायरी लिखते हैं, जिसके पहले कुछ पन्नों पर उनके प्रेरक उद्धरण हैं।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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