मुंबई, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ ‘‘मजबूत स्थिति’’ में अधिक गहनता से जुड़ रहा है। उन्होंने देश के बढ़ते आर्थिक प्रभाव के प्रमाण के रूप में हाल ही में हुए कई व्यापार समझौतों का हवाला दिया। उन्होंने ‘वैश्विक आर्थिक सहयोग सम्मेलन’ में अपने संबोधन में अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण व्यापार समझौते सहित कई बड़े सौदों की सफल चर्चा पर प्रकाश डाला।
‘वैश्विक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम’ का आयोजन ‘भविष्य आर्थिक सहयोग परिषद’ द्वारा विदेश मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से किया जाता है।
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को शायद हाल के समय में सबसे अस्थिर बताते हुए मंत्री ने कहा कि दुनिया उत्पादन और वित्त के ‘‘हथियारीकरण’’ के साथ-साथ निर्यात नियंत्रणों को कड़ा करने और अस्थिर बाजार परिवर्तनों की गवाह बन रही है।
उन्होंने कहा ‘‘स्थापित वैश्विक व्यवस्था स्पष्ट रूप से बदल रही है इसके विकल्प तैयार करना मुश्किल है और ऐसा प्रतीत होता है कि हम एक अनिश्चितता के लंबे दौर की ओर बढ़ रहे हैं। यह दौर अव्यवस्थित जोखिम भरा अप्रत्याशित और शायद खतरनाक भी होगा।’’ मंत्री ने कहा कि लंबे समय से बरकरार धारणाएं और अपेक्षाएं अब सवालों के घेरे में आ गई हैं।
उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख आयाम एक साथ बदल रहे हैं भले ही वह रणनीतिक हो राजनीतिक हो आर्थिक हो या प्रौद्योगिकी हो। उन्होंने कहा कि जोखिम कम करने और कई क्षेत्रों में विविधता लाने में समाधान निहित हैं तथा यह दृष्टिकोण राष्ट्रों की नीति में तेजी से दिखाई दे रहा है।
जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि ‘‘सुधार एक्सप्रेस’’ लगातार जारी रहेगी।
विदेश मंत्री ने कहा ‘‘मजबूत स्थिति में भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ अधिक गहनता से जुड़ रहा है। हाल में हुए व्यापार समझौतों में यह बात स्पष्ट रूप से देखी गई।’’ उन्होंने कहा कि आर्थिक सुरक्षा को मजबूत आत्मनिर्भरता और अधिक भरोसेमंद साझेदारों के माध्यम से ही बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की हाल में घोषणा की।
हालांकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के माध्यम से ‘‘भारत माता को बेच दिया।’’ उन्होंने इसे ‘‘पूरी तरह से आत्मसमर्पण’’ करार दिया जिसमें भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंप दी गई और किसानों के हितों से समझौता किया गया।
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए पिछले महीने बातचीत पूरी की जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे। पिछले एक साल में भारत ने ब्रिटेन न्यूजीलैंड और ओमान के साथ भी व्यापार समझौते किए हैं।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया एक अस्थिर और अनिश्चित युग में प्रवेश कर चुकी है जो ‘‘हमारे जीवनकाल में संभवतः सबसे अधिक उथल-पुथल भरा युग’’ है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेवाओं प्रौद्योगिकी कौशल और ज्ञान के क्षेत्र में उत्पादन के वैश्विक समीकरण में भारत की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
जयशंकर ने कहा कि अमेरिका हर कीमत पर पुन: औद्योगीकरण के लिए दृढ़ संकल्पित है और यह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उसके भविष्य के लिए अहम महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण और निर्यात पर चीन का लगातार ध्यान है तथा इसमें संभवतः और भी विस्तार होगा।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज और ध्रुवीकृत होती जा रही है ऊर्जा व्यापार के प्रवाह में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है और नए दृष्टिकोण सैन्य तरीके अपनाने सहित अधिक जोखिम को बढ़ावा दे रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रवासन और यहां तक कि आवाजाही भी विवाद का विषय बनती जा रही है। जयशंकर ने कहा ‘‘प्रत्येक राष्ट्र और प्रत्येक समाज अपने हितों और आकलन के अनुसार प्रतिक्रिया देगा।’’
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common