नयी दिल्ली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पूर्व महानिदेशक के. विजय कुमार को 25 मई को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। विजय कुमार ने भारतीय पुलिस सेवा में अपने विशिष्ट करियर के दौरान कई चर्चित उग्रवाद-रोधी और आतंकवाद-रोधी अभियानों का नेतृत्व किया।
तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी विजय कुमार को उस विशेष कार्य बल का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है जिसने दो दशक लंबे तलाश अभियान के बाद 2004 में वन डाकू वीरप्पन को मार गिराया था।
पंद्रह सितंबर 1952 को जन्मे विजय कुमार ने आईपीएस में शामिल होने से पहले सेंट जोसेफ कॉलेज और मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की। विजय कुमार वर्ष 1976 में आईएएस के लिए चयनित हुए लेकिन उन्होंने पुलिस सेवा में बने रहना चुना।
लगभग पांच दशकों के अपने करियर के दौरान उन्होंने चेन्नई के पुलिस आयुक्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक और केंद्रीय गृह मंत्रालय में वामपंथी उग्रवाद और जम्मू-कश्मीर मामलों के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
वर्ष 2010 से 2012 के बीच सीआरपीएफ के महानिदेशक के रूप में विजय कुमार ने दंतेवाड़ा में नक्सली हमले के बाद प्रशिक्षण और अभियानों के आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया।
इसके बाद उन्होंने 2013 से 2018 तक वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्य किया इस अवधि के दौरान माओवादी हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common