सलमान खान की गलवान घाटी संघर्ष पर बनी फिल्म ‘मातृभूमि’ चार दिसंबर को होगी रिलीज

मुंबई,  बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने घोषणा की कि लंबे समय से लंबित उनकी  गलवान घाटी संघर्ष पर बनी फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ चार दिसंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे सलमान ने यहां आयोजित प्रचार कार्यक्रम के दौरान इसकी रिलीज की तारीख की घोषणा की। अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प पर आधारित है।

          फिल्म की रिलीज में देरी के बारे में पूछे जाने पर सलमान ने कहा कि टीम यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि फिल्म के दृश्य प्रभाव (वीएफएक्स) बेहतरीन स्तर के हों।

          सुपरस्टार ने संवाददाताओं से कहा    आज बहुत सारे वीएफएक्स विशेषज्ञ हैं  जो किसी फिल्म के हर दृश्य की बारीकी से जांच करते हैं। इसलिए हम इस फिल्म में किसी को भी ऐसा मौका नहीं देना चाहते कि वह किसी दृश्य को बड़ा करके देखे और उसके वीएफएक्स की आलोचना करे। हम चाहते हैं कि फिल्म के दृश्य हर किसी को हैरान कर दें। इसे बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है। 

          उन्होंने कहा    हमें लगा था कि हम फिल्म की शूटिंग 45-50 दिनों में पूरी कर लेंगे  लेकिन हमारी सह-कलाकार चित्रांगदा सिंह चोटिल हो गईं और उन्हें ठीक होने में समय लगा। पहले फिल्म को जनवरी या जून में रिलीज किया जाना था  लेकिन बाद में इसे अगस्त तक टाल दिया गया। अब यह चार दिसंबर को रिलीज होगी।  पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से घोषित इस फिल्म का नाम बाद में बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ कर दिया गया। यह फिल्म मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच हुए सैन्य गतिरोध से प्रेरित है। उसी साल जून में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद भारत और चीन के संबंधों में काफी तनाव आ गया था। इस संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे।

          फिल्म में सलमान खान बिक्कुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं  जिन्होंने 16 बिहार रेजिमेंट के 19 अन्य जवानों के साथ इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई थी।

          सुपरस्टार ने पिछले साल दिसंबर में अपने 60वें जन्मदिन पर फिल्म का पहला टीजर जारी किया था। चीन के सरकारी मीडिया संस्थान  ग्लोबल टाइम्स  ने इस टीजर की आलोचना करते हुए दावा किया था कि फिल्म में घटनाओं को सिनेमाई रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

          उस समय भारत सरकार के एक सूत्र ने कहा था    भारत में सिनेमाई अभिव्यक्ति की परंपरा रही है। 1964 में भारत-चीन युद्ध 1962 पर आधारित फिल्म  हकीकत  बनी थी। हाल ही में रेजांग ला की ऐतिहासिक लड़ाई पर  120 बहादुर  फिल्म भी बनाई गई। सिनेमा एक कलात्मक अभिव्यक्ति है और भारत इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता। 

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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