बचत के लिए म्यूचुअल फंड पहली पसंद, एफडी-आरडी का आकर्षण भी बरकरार: सर्वेक्षण

नयी दिल्ली, भारत में बचत और निवेश करने वालों के बीच म्यूचुअल फंड सबसे पसंदीदा विकल्प हैं लेकिन बैंक की सावधि जमा (एफडी) और आवर्ती जमा (आरडी) का आकर्षण भी बरकरार है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। डिजिटल निवेश मंच स्टेबल मनी की ओर से वैश्विक शोध एवं विश्लेषण समूह यूगोव के जरिये कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक 23 प्रतिशत बचतकर्ताओं ने म्यूचुअल फंड को अपनी पहली पसंद बताया जबकि 21 प्रतिशत ने एफडी और आरडी को प्राथमिकता दी।

सर्वेक्षण में 57 प्रतिशत बचतकर्ताओं ने म्यूचुअल फंड को अपने शीर्ष तीन निवेश विकल्पों में शामिल किया। इसके बाद 56 प्रतिशत ने एफडी और आरडी 45 प्रतिशत ने सोने और चांदी 39 प्रतिशत ने बीमा एवं बचत योजनाओं और 36 प्रतिशत ने शेयरों को अपने शीर्ष तीन विकल्पों में जगह दी। निश्चित आय वाले निवेश विकल्पों में एफडी और आरडी की लोकप्रियता सबसे अधिक है। इनके मुकाबले 20 प्रतिशत बचतकर्ताओं ने सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) 19 प्रतिशत ने सरकारी बॉन्ड और सात प्रतिशत ने कॉरपोरेट बॉन्ड को अपने शीर्ष तीन विकल्पों में शामिल किया।

यह सर्वेक्षण 13 से 16 अक्टूबर के बीच देश के 150 से अधिक शहरों और कस्बों में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के 1 212 लोगों के बीच कराया गया। इनमें से 1 003 लोग (83 प्रतिशत) बचत या निवेश कर रहे थे। सर्वेक्षण में इन्हीं लोगों के निवेश व्यवहार और वित्तीय प्राथमिकताओं का आकलन किया गया। सर्वेक्षण के मुताबिक बचत और निवेश करने वाले 80 प्रतिशत लोग डिजिटल मंचों का इस्तेमाल करते हैं जबकि 65 प्रतिशत ने 30 साल की उम्र तक बचत या निवेश शुरू कर दिया था।

घरेलू वित्तीय फैसलों के मामले में 56 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे ये फैसले खुद लेते हैं जबकि 23 प्रतिशत अपने जीवनसाथी के साथ मिलकर फैसले करते हैं। वहीं 11 प्रतिशत ने कहा कि ये फैसले उनके जीवनसाथी लेते हैं और इतने ही प्रतिशत ने वित्तीय सलाहकारों पर निर्भरता जताई।

महिला उत्तरदाताओं में 46 प्रतिशत ने कहा कि वे घरेलू वित्तीय फैसले खुद लेती हैं जबकि 29 प्रतिशत जीवनसाथी के साथ मिलकर ऐसे फैसले करती हैं। सर्वेक्षण में अलग-अलग पीढ़ियों के वित्तीय लक्ष्यों में भी अंतर सामने आया। जेन जी (1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) के 26 प्रतिशत लोगों ने घर खरीदने को अपनी सबसे बड़ी वित्तीय प्राथमिकता बताया। वहीं जेन एक्स (1965 से 1980 के बीच जन्मी पीढ़ी) के 35 प्रतिशत लोगों ने सेवानिवृत्ति के लिए बचत को अपनी पहली प्राथमिकता बताया।

अचानक बड़ी रकम मिलने की स्थिति में 87 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे उसका इस्तेमाल निवेश बचत या कर्ज चुकाने के लिए करेंगे। इनमें 32 प्रतिशत ने शेयरों या म्यूचुअल फंड जैसे अधिक वृद्धि की संभावना वाले विकल्पों में निवेश करने जबकि 25 प्रतिशत ने निश्चित आय वाले उत्पादों में पैसा लगाने की बात कही। इसके अलावा 19 प्रतिशत ने बचत खाते में रकम रखने और 11 प्रतिशत ने कर्ज चुकाने को प्राथमिकता दी।

स्टेबल मनी के सह-संस्थापक सौरभ जैन ने कहा कि भारतीयों में बचत की आदत बरकरार है लेकिन अब इसके लिए डिजिटल मंचों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 65 प्रतिशत लोगों ने 30 साल की उम्र तक बचत शुरू कर दी थी और 56 प्रतिशत घरेलू वित्तीय फैसले खुद लेते हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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