पर्यटन पर सम्मेलन में विशेषज्ञों की राय: एआई को मानव निर्णय का स्थान नहीं लेना चाहिए

शिलांग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल पर्यटन की योजना बनाने और सेवाएं प्रदान करने में सहायता के लिए एक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए लेकिन इसे मानवीय निर्णय स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों का स्थान नहीं लेना चाहिए। एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने यह बात कही।

मेघालय इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस के निदेशक ऐबन स्वेर ने कहा कि एआई आधारित पर्यटन नीतियों में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रौद्योगिकी मानव निर्णय का स्थान लिए बिना योजना और निर्णय लेने में सहायता करे तथा संस्कृति आजीविका और आंकड़ों की भी सुरक्षा करे।

स्वेर ने सोमवार को साइनोड कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में ‘‘एआई आधारित पर्यटन शासन और नीतिगत रूपरेखा’’ विषय पर कहा ‘‘नीतियों में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एआई निर्णय न ले बल्कि इसका इस्तेमाल योजना बनाने के लिए किया जाए।’’

स्वेर ने कहा कि नीतियों में यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ‘‘यदि प्रौद्योगिकी विफल हो जाए तब भी मनुष्य उसकी जिम्मेदारी संभाल सकें।’’ उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में एआई के बढ़ते एकीकरण के बीच मानवीय निगरानी और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने तकनीकी नवाचार समझदारीपूर्ण निर्णय लेने समावेशिता और सुगम्यता स्थिरता तथा वैश्विक ब्रांडिंग को एआई आधारित पर्यटन नीतियां विकसित करते समय ध्यान में रखे जाने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया।

उन्होंने मेघालय की संस्कृति और विरासत के संरक्षण में एआई और डिजिटल प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं को भी रेखांकित किया साथ ही आगाह किया कि शासन तंत्र को नैतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करना चाहिए।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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