नयी दिल्ली, भारत को अपने बिजली ग्रिड पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए ग्रिड को मजबूत करने वाली प्रौद्योगिकियों डायनेमिक कंजेशन मैनेजमेंट परीक्षण और साइबर सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। सोमवार को जारी एक श्वेतपत्र में यह सुझाव दिया गया।
उद्योग मंडल फिक्की और सलाहकार फर्म नांगिया समूह की तरफ से जारी संयुक्त श्वेतपत्र के मुताबिक भारत की स्थापित बिजली क्षमता में आधे से अधिक अब गैर-जीवाश्म स्रोतों से आती है। ऐसे में बिजली ग्रिड की स्थिरता का देश के ऊर्जा बदलाव में निवेशकों के भरोसे पर सीधा असर पड़ता है। रिपोर्ट कहती है कि अप्रैल 2026 में बिजली की अधिकतम मांग रिकॉर्ड 256 गीगावाट पर पहुंच गई। बढ़ती मांग के बीच ग्रिड पर दबाव बढ़ रहा है जबकि पारंपरिक बिजली संयंत्रों से मिलने वाली प्रणालीगत मजबूती कम हो रही है।
रिपोर्ट में बिजली ग्रिड पर दबाव के आठ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें आवृत्ति वोल्टेज और प्रणालीगत मजबूती बिजली की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रणाली दोलन मांग-पूर्वानुमान और ग्रिड में भीड़ लचीलापन और ब्लैक-स्टार्ट मॉडलिंग क्षमता तथा साइबर-भौतिक सुरक्षा शामिल हैं।
नांगिया समूह के प्रबंध साझेदार सूरज नांगिया ने कहा कि भारत ने पांच साल से भी कम समय में करीब 140 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी है। अप्रैल 2021 में यह क्षमता करीब 382 गीगावाट थी जो जनवरी 2026 में बढ़कर 520 गीगावाट से अधिक हो गई। जून 2025 में कुल स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई।
उन्होंने कहा कि बिजली ग्रिड को समर्थन देने वाली लचीलापन पारेषण और संस्थागत क्षमता को भी उत्पादन क्षमता के समान गति से बढ़ाने की जरूरत है। श्वेतपत्र में तकनीकी नियामकीय/नीतिगत बाजार/वाणिज्यिक और संस्थागत/क्षमता से जुड़े चार क्षेत्रों में 14 प्राथमिकता वाले कदम सुझाए गए हैं। इसमें ग्रिड को मजबूत करने के लिए ग्रिड-संवर्धन प्रौद्योगिकी और डायनेमिक कंजेशन मैनेजमेंट को बढ़ावा देने तथा मानकों परीक्षण और साइबर सुरक्षा के साथ बाजार एवं अनुबंध व्यवस्था में तालमेल की सिफारिश की गई है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common