26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत का राष्ट्रीय बयान दिया। इसमें भारत ने खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष में संयम बरतने, कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की बात कही। भारत ने चेतावनी दी कि युद्ध और आर्थिक दबाव उन देशों को भी नुकसान पहुँचाते हैं जो संघर्ष वाली जगहों से दूर हैं, और अक्सर सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों की फैसलों में बहुत कम भूमिका होती है।भारत ने खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव पर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करने वाले कमर्शियल जहाज़ों और नाविकों पर हमलों की निंदा की।
भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ऊर्जा की सप्लाई और व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रहे। यूक्रेन युद्ध का ज़िक्र करते हुए, भारत ने शांति की चल रही कोशिशों का समर्थन किया और कहा कि नाविकों की सुरक्षा और अनाज व ऊर्जा की सप्लाई पर भी तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।पश्चिम एशिया के मामले में, भारत ने स्थायी शांति के आधार के तौर पर ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-देश समाधान) के लिए अपना समर्थन दोहराया और कहा कि वह फिलिस्तीनियों को मानवीय सहायता दे रहा है।
बयान में कहा गया कि शांति के लिए स्थिरता और भविष्य के बारे में निश्चितता के साथ-साथ सशस्त्र संघर्ष का खत्म होना भी ज़रूरी है।भारत ने “हर चीज़ के हथियार बनने” (weaponization of everything) के ख़िलाफ़ चेतावनी दी और उन प्रतिबंधों की ओर इशारा किया जो फाइनेंस, बाज़ार तक पहुँच, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, संसाधनों और कनेक्टिविटी को प्रभावित करते हैं। भारत ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ को “4F संकट” का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें भोजन (food), ईंधन (fuel), उर्वरक (fertilizer) और फाइनेंस (finance) शामिल हैं।
खाद की कमी, अनाज की ढुलाई में रुकावटें और जलवायु से जुड़ी चुनौतियां इन मुश्किलों को और बढ़ा रही हैं, साथ ही विकास के लक्ष्यों और गरीब देशों की औद्योगिक विकास की क्षमता पर भी दबाव पड़ रहा है।बयान में आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति अपनाने की बात कही गई, जिसमें आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग और सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सरकारों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। किसी देश का नाम लिए बिना, भारत ने असेंबली में पिछले दिन की गई उन टिप्पणियों को खारिज कर दिया, जिनका मकसद तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना और आतंकवाद को सामान्य बताना था।
भारत ने ऐसे खतरों से अपनी रक्षा करने के अपने अधिकार पर ज़ोर दिया।विकास में भारत के योगदान का ज़िक्र करते हुए, बयान में 78 देशों में चल रही 600 बड़ी भारतीय परियोजनाओं का हवाला दिया गया, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, खेती, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसमें स्वच्छ ऊर्जा और पानी से जुड़ी पहलों, मेडिकल सप्लाई, आपदा के समय मदद और संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा 11 शांति-रक्षा अभियानों में से नौ में भारत की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला गया।भारत ने खाड़ी से लेकर लाल सागर और काले सागर तक जहाजों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई और कहा कि इन हमलों में भारतीयों समेत कई नाविकों की जान गई है। भारत ने कहा कि वह ऐसे हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध खड़ा करने की पहल में लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदारों के साथ शामिल हुआ है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बारे में भारत ने कहा कि यह तकनीक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर समस्याओं को हल करने का एक जरिया है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि इसके गलत इस्तेमाल से भेदभाव बढ़ सकता है। भारत का कहना था कि देशों को अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से AI मॉडल और उन्हें लागू करने की रणनीतियां विकसित करने में सक्षम होना चाहिए, और AI ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ भारत के सहयोग का एक हिस्सा होगा।बयान का समापन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाने की अपील के साथ हुआ। जैसे-जैसे दुनिया बहुध्रुवीय (मल्टीपोलर) होती जा रही है, भारत ने कहा कि शांति व्यापक विचार-विमर्श, पारदर्शी फैसलों और ऐसे सुधारों पर निर्भर करेगी जो मानवता के बड़े हिस्से को अपनी बात रखने का मौका दें।https://x.com/DrSJaishankar/status/2103648120743584156/photo/2