रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया है। उन्होंने आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया। वे 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में आयोजित SCO के शासनाध्यक्षों की परिषद (CHG) की 25वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे।रक्षा मंत्री ने कहा, “आतंकवाद के कारण निर्दोष लोगों की जान जाती है और निवेश तथा व्यापार पर बुरा असर पड़ता है। यह समाजों में कट्टरता फैलाता है और युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है, जिनके वे हकदार हैं। आतंकवाद को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता; इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। जो लोग आतंकवादियों को आर्थिक मदद देते हैं, उनका समर्थन करते हैं या उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराते हैं, उनके लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

” राजनाथ सिंह ने अगस्त-सितंबर 2026 में बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन की चर्चाओं को याद किया, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों से जुड़े मुद्दों पर संगठन द्वारा ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। रक्षा मंत्री ने भारत के इस नजरिए को दोहराया कि आर्थिक जुड़ाव ऐसा होना चाहिए जो सभी सदस्य देशों के लिए समावेशी हो और जिससे सबको आपसी लाभ मिले। उन्होंने कहा, “भारत का मानना है कि SCO को संप्रभु समानता, आम सहमति और आपसी सम्मान के सिद्धांतों का पालन करने में कुशल और दृढ़ रहना चाहिए। संस्थानों की संख्या अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि उपलब्धियां भी अधिक होंगी। नई व्यवस्थाओं का ध्यान स्पष्ट रूप से पहचानी गई जरूरतों पर होना चाहिए, काम के दोहराव से बचना चाहिए, और सदस्य देशों को व्यावहारिक लाभ पहुंचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि SCO को आम सहमति बनानी चाहिए और उसे ठोस कार्रवाई में बदलना चाहिए, ताकि अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल से निपटा जा सके। इस माहौल में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावटें, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं, और उभरते हुए तकनीकी अंतर जैसी चुनौतियां शामिल हैं। मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने और…उन्होंने कहा कि विकास को बढ़ावा देने के लिए व्यापार और निवेश को बढ़ाया जाना चाहिए और तकनीक का लाभ उठाया जाना चाहिए। इस बात पर जोर देते हुए कि आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए, उन्होंने 2026-2030 की अवधि के लिए ‘बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम’ के तहत एक कार्य योजना को अपनाने के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया।राजनाथ सिंह ने बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में लिए गए उन फैसलों का स्वागत किया, जिनके तहत ताशकंद में ‘यूनिवर्सल सेंटर’ और दुशांबे में ‘एंटी-ड्रग सेंटर’ को संगठन के स्थायी निकायों के रूप में स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इनकी प्रभावशीलता बेहतर समन्वय और कार्यों के समय पर निष्पादन पर निर्भर करेगी।साझा समृद्धि के लिए कनेक्टिविटी के महत्व को रेखांकित करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत उन पहलों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ती हैं, व्यापार को आसान बनाती हैं और विकास के नए रास्ते खोलती हैं। उन्होंने कहा कि ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ और ‘चाबहार बंदरगाह’ जैसी पहल मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि कनेक्टिविटी आपसी परामर्श पर आधारित होनी चाहिए और इसमें सभी देशों की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो परियोजनाएं इन सिद्धांतों पर आधारित नहीं होंगी, वे टिकाऊ नहीं हो सकेंगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल भौतिक कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर, पूरे क्षेत्र में व्यापार की लागत को कम करने के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना, डिजिटल दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना, लॉजिस्टिक्स में सुधार करना और इंटरऑपरेबल (आपस में जुड़ने वाले) डिजिटल समाधानों को अपनाना आवश्यक है।

रक्षा मंत्री ने इस महीने की शुरुआत में मुंबई में मध्य एशिया में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण पर आयोजित संगोष्ठी का उल्लेख किया और इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए मध्य एशियाई देशों तथा SCO साझेदारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने पहली बार आयोजित ‘SCO एशियाई आर्थिक संवाद’ (SCO Asian Economic Dialogue) के आयोजन का भी जिक्र किया।राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारी सफलता को इस आधार पर मापा जाना चाहिए कि हम युवाओं के लिए कितने अवसर पैदा करते हैं, अपने उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खोलते हैं, अपने किसानों और छोटे व्यवसायियों को कौन सी तकनीकें उपलब्ध कराते हैं, और समाजों के बीच किस तरह के संबंध विकसित करते हैं।”रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का अपना विकास अनुभव यह दिखाता है कि तकनीक और नवाचार (innovation) में विकास को गति देने और समस्याओं का समाधान निकालने की कितनी बड़ी क्षमता है।

उन्होंने भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे) का उल्लेख किया, जिसने सार्वजनिक सेवाओं के वितरण के तरीके को बदल दिया है और वित्तीय समावेशन (financial inclusion) को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक का निर्माण किया है। महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर देश का जोर इस विश्वास पर आधारित है कि विकास की दिशा तय करने में महिलाओं की अहम भूमिका होती है।

राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि ‘इंटरनेशनल सोलर एलायंस’ और ‘कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ जैसी भारत की वैश्विक पहलें, किफायती स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास में योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि ‘मिशन LiFE’ टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदारी से उपभोग को बढ़ावा देता है, जबकि ‘ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस’ स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को प्रोत्साहित करता है।रक्षा मंत्री ने SCO से आग्रह किया कि वे पिछले 25 वर्षों में बनी मजबूत नींव को और आगे बढ़ाएं, तथा आम सहमति पर आधारित सहयोग और ठोस परिणामों पर केंद्रित एक भविष्योन्मुखी रोडमैप तैयार करें।

उन्होंने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने सदस्य देशों को इस साल के आखिर में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले पहले ‘SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।बैठक में SCO सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक और व्यापार सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की गई।

साथ ही, परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की गई।प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने SCO शासनाध्यक्ष परिषद (Council of Heads of Government – CHG) की 25वीं बैठक के संयुक्त विज्ञप्ति (Joint Communiqué) को अपनाया। इसमें 2027 के लिए SCO का बजट, वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय, तथा 2026-2030 के लिए PMTEC कार्य योजना (Action Plan) शामिल हैं।SCO CHG, संगठन का एक महत्वपूर्ण तंत्र है जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक और अन्य व्यावहारिक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने का काम करता है। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है और इसके विभिन्न तंत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है।https://x.com/rajnathsingh/status/2112488330399207737/photo/1

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