कोलकाता, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अन्य दल को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने के निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ आईएसएफ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को कहा कि प्राधिकारों को अदालत के सामने ‘‘निष्पक्ष’’ रहना चाहिए। उच्च न्यायालय ने सवाल उठाया कि क्या निर्वाचन आयोग (ईसी) और नवगठित डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (डीटीसी) के बीच कोई ‘‘मिलीभगत’’ है।
डीटीसी को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने पूछा कि निर्वाचन आयोग (ईसी) ने इस चुनाव चिह्न के लिए आईएसएफ की अर्जी पर विचार क्यों नहीं किया जो 17 सितंबर को उसके पास मौजूद थी। निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि चुनाव चिह्न आवंटित करना आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और उसने डीटीसी को ‘लिफाफा’ तथा आईएसएफ को ‘आलमारी’ चिह्न आवंटित करते समय कानून के अनुसार काम किया।
याचिकाकर्ता के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने दलील दी कि विवेक का इस्तेमाल समझदारी और तर्कपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए तथा यह ‘‘किसी तानाशाह की तरह बेलगाम नहीं हो सकता।’’ न्यायमूर्ति राव ने कहा ‘‘इस अदालत को भी यह समझ आ रहा है कि इसमें क्या मिलीभगत है।’’उच्च न्यायालय ने कहा कि संबंधित पक्षों की ओर से पेश होने वाले वकीलों का व्यवहार यह जाहिर करता है कि उनके बीच ‘‘किस तरह की मिलीभगत’’ है।
उसने पूछा ‘‘अगर निर्वाचन आयोग ने निजी प्रतिवादी के कहने पर काम किया है तो फिर आगे क्या बचता है ’’ न्यायमूर्ति राव ने कहा ‘‘प्रशासन को अदालत के सामने निष्पक्ष रहना चाहिए।’’ निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि उन्हें डीटीसी के वकील से कोई निर्देश नहीं मिल रहा था जिस पर न्यायमूर्ति राव ने कहा कि वह वही बात कहेंगे जो उन्होंने अदालत में देखी है। न्यायमूर्ति राव ने निर्वाचन आयोग के वकील से कहा कि चूंकि वह एक संवैधानिक संस्था की ओर से पेश हो रहे हैं इसलिए उन्हें अदालत के सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए तथा वह किसी और की मदद नहीं ले सकते।निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि निजी पक्षकार के वकील ने उन्हें कुछ नहीं बताया था। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी ‘‘सही नहीं’’ है कि उन्हें किसी राजनीतिक पार्टी से निर्देश मिल रहे हैं और इस तरह के आरोप का कोई आधार नहीं है।
बहस के दौरान न्यायमूर्ति राव ने कहा कि आईएसएफ का ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर शायद कोई अधिकार न हो और उसकी अर्जी ठुकराई जा सकती है ‘‘लेकिन इसे खारिज करने के पीछे ठोस वजह होनी चाहिए।’’ डीटीसी के वकील ने कहा कि निर्वाचवन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों — ममता तृणमूल कांग्रेस और डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस — को पार्टियों के तौर पर मान्यता दी थी। उन्होंने दलील दी कि आईएसएफ का किसी खास चुनाव चिह्न पर कोई ऐसा अधिकार नहीं है जिसे बदला न जा सके। मामले की सुनवाई पूरी हो गई जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common